Hot Masala Board - Free Indian Sex Stories & Indian Sex Videos. Nude Indian Actresses Pictures, Masala Movies, Indian Masala Videos


Go Back   Hot Masala Board - Free Indian Sex Stories & Indian Sex Videos. Nude Indian Actresses Pictures, Masala Movies, Indian Masala Videos > Hindi Sex Stories - Free Indian Sex Stories in Hindi Fonts !!!

Reply
 
Thread Tools Display Modes
  #1  
Old 04-30-2017, 09:06 AM
desiman7 desiman7 is offline
Senior Member
 
Join Date: Jan 2012
Posts: 217,865
Default प्रणय-चिह्नं

कहां तो वह मेरी बात भी नहीं सुनती थी और कहाँ उस दिन बोली, “मैं तैयार हूँ. जहाँ तुम्हारा मन चाहे, ले चलो.”

मेरे मस्तिष्क की कार्य-प्रणाली दिल्ली टेलिफोन-व्यवस्था से बहुत साम्य रखती है. उसकी स्वीकृति पाई और इधर गलत लाइन मिल गई. मेरे मन में अपनी मां का चेहरा उभरा. कब से मां कह रही है, “बेटा! वह कौन-सा दिन होगा जब तू एक चाँद-सी बहू मुझे ला देगा.” मेरे मन ने कहा, “यही अवसर है नरेन्द्र कोहली. दोनों की इच्छाएँ पूरी कर दे. इसकी इच्छा है कि इसे कहीं ले चल और मां की इच्छा है कि उसे बहू ला दे. बस! अब सोच मत. सास-बहू का मिलाप करा दे.”
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #2  
Old 04-30-2017, 09:07 AM
totapuri totapuri is offline
Senior Member
 
Join Date: Jan 2012
Posts: 217,162
Default प्रणय-चिह्नं

रूप की छाया
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #3  
Old 04-30-2017, 09:08 AM
sherkhan sherkhan is offline
Senior Member
 
Join Date: Jan 2012
Posts: 218,292
Default प्रणय-चिह्नं

दादी फ्लोरीडा नहीं जाना चाहती थी। वह पूर्वी टेनैसी में अपने कुछ रिश्तेदारों से मिलना चाहती थी और हर तरह से बैली के निर्णय को बदलने का जतन कर रही थी। बैली उसका इकलौता बेटा था जिसके साथ वह रहती थी। वह मेज़ के पास कुर्सी पर बैठा ‘जॅर्नेल’ पत्रिका के खेल सम्बन्धी पन्ने पलट रहा था। ‘देखो बैली’, वह बोली ‘यह देखो और पढ़ो’ और वह अपने निर्बल कूल्हों पर एक हाथ रखते हुए खड़ी हो गई और अख़बार के पन्ने उसके गंजे सिर पर खड़खड़ाकर फैला दिए- ‘यह कोई बदमाश है जो खुद को मिसफ़िट के नाम से पुकारता है। यह फेडरल पैन के जेल से भाग निकला है और फ्लोरीडा पहुंचकर जो उसने इन लोगों का हश्र किया है उसे पढ़ो तुम, पढ़ो तो। मैं अपने बच्चों को उस जगह हर्गिज़ नहीं ले जा सकती जहां ऐसा मुजरिम खुले-बन्दों घूम रहा हो। अगर मैं ऐसा करूँ तो कभी अपनी आत्मा को जवाब नहीं दे पाऊँगी।’

जब बैली ने उसकी ओर सिर उठाके देखा तक नहीं तो दादी बच्चों की माँ की ओर मुड़ी, एक जवान स्त्री जिसने पाजामा पहन रखा था जिसका चेहरा किसी बन्दगोभी-सा सुथरा और मासूम था और हरे रंग के रूमाल में यूँ लिपटा हुआ था कि दोनों सिरे किसी ख़रगोश के कान जैसे नज़र आते थे। वह सोफ़े पर बैठी थी और छोटे बच्चे को मर्तबान से निकालकर ख़ूबानी खिला रही थी। ‘बच्चे फ्लोरीडा पहले भी जा चुके हैं’ बूढ़ी महिला ने कहा- ‘तुम्हें तब्दीली के लिए उन्हें कहीं और भी ले जाना चाहिए ताकि वे दुनिया के दूसरे भाग भी देखें और स्वभाव से उदार हो सकें। ये लोग कभी पूर्वी टेनैसी नहीं गये।’

बच्चों की माँ ने जैसे उसकी बात सुनी ही नहीं लेकिन आठ वर्षीय लड़के जॉन वैसली ने जो मोटा था और चश्मा लगाता था, कहा- ‘अगर तुम फ्लोरीडा नहीं जाना चाहतीं तो घर पर क्यों नहीं रुकतीं,’ वह और छोटी लड़की, जून स्टार, फर्श पर बैठे कॉमिक्स पढ़ रहे थे।

‘वह घर पर नहीं रुकेगी चाहे एक दिन का राजपाट ही क्यों न मिल जाए’, जून स्टार ने अपना ज़र्द सिर उठाये बिना कहा।

‘अच्छा और तुम क्या कर लोगे अगर इस मिसफ़िट के हाथों पकड़े गए तो दादी ने पूछा।

‘मैं उसका मुंह नोच लूँगा’, जॉन वैसली ने कहा।

‘दस लाख डॉलर दो तो भी वह घर पर नहीं रुकेगी’ जून स्टार ने कहा- ‘इस डर से कि कहीं, कुछ मिस न हो जाए। उसे हर उस जगह जाना है जहां हम जायें।’

‘ठीक है लड़की,’ दादी ने कहा- ‘मगर यह बात तब याद रखना जब अगली बार तुम्हें मुझसे अपने बालों में घूंघर डलवाना हो।’

जून स्टार ने कहा- उसके बाल कुदरती घुंघराले थे।

अगली सुबह जाने के लिए दादी सबसे पहले कार में तैयार थी। उसके साथ एक बड़ा काला बैग जो देखने में किसी हिपपॉट्मस के सिर के समान लगता था, एक कोने में रखा था, और उसके तले में उसने एक डलिया छिपाई हुई थी जिसमें, पिट्टी सिंग, बिल्ला था, वह तीन दिन के लिए बिल्ले को घर में अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी क्योंकि बिल्ला उसे याद करता था। यह भी ख़तरा था कि गैस के चूल्हों से छेड़खानी में गैस निकल आती और वह घुट के मर जाता। उसका बेटा बैली, किसी ठहरने की जगह पर बिल्ले के साथ रुकना बिल्कुल पसन्द नहीं करता था।

दादी पिछली सीट पर बीच में बैठी थी, जॉन वैसली उसके एक तरफ़ था और जून स्टार दूसरी तरफ़। बैली और बच्चों की माँ और सबसे छोटा बच्चा सामने बैठे थे और उन्होंने आठ-पैंतालीस पर जब कार का माइलोमीटर 55890 दिखा रहा था एटलांटा छोड़ा था। दादी ने यह इसलिए लिख लिया था कि लौटकर वह कितने मील चले का हिसाब लगाना दिलचस्प होगा। शहर की सीमा से निकलने में उन्हें बीस मिनिट लगे।

बूढ़ी महिला आराम से पसरकर बैठ गयी थी और सफ़ेद सूती दस्ताने उतारकर अपने पर्स के साथ पिछले कांच के सामने शेल्फ़ पर रख दिये थे। बच्चों की माँ अभी भी वही पाजामा पहने थी और उसका सिर हरे रुमाल में लिपटा था, लेकिन दादी के सिर पर गहरा नीला समुद्री मल्लाहों का-सा हैट था जिसमें नीले रंग के फूलों का गुच्छा लगा था और नीले रंग की ही उसकी पोशाक थी। जिस पर छोटी सफ़ेद बुनकी का छापा था। उसके कॉलर और कफ़ सफ़ेद महीन मलमल के थे जिसमें लेस की गोट लगी थी और गिरेबान में उसने कासनी कपड़े के फूलों का सुगंधित गुच्छा सजाया हुआ था। यह इसलिए कि अगर किसी दुर्घटना के बाद कोई उसे मरा हुआ देखे तो फ़ौरन समझ जाए कि वह एक सम्मानीय महिला थी।

उसने कहा कि उसके ख़्याल में ड्राइविंग के लिए यह एक अच्छा दिन होने वाला था, न ज़्यादा गर्म न ठण्डा, और उसने बैली को सावधान किया कि गति सीमा पचपन मील फी घण्टा थी और यह कि चैक करने वाले दस्ते इश्तहारों के बड़े बोर्डों और पेड़ों के छोटे झुरमुटों के पीछे छिपकर बैठते हैं और आपको स्पीड कम करने का अवसर दिये बिना आपका पीछा करते हैं। उसने फैले दृश्य के बारे में कुछ दिलचस्प तफ़सील बताईः पथरीला पहाड़; नीला ग्रेनाइट जो कुछ जगहों पर सड़क के दोनों ओर आ जाता था; चमकदार लाल मिट्टी के किनारे जो जहाँ-तहाँ नीलाहट लिये हुए थे; और तरह-तरह की फ़सलें जो हरे रंग की पंक्तियों में धरती को सजाये हुए थीं। दरख्त रुपहली धूप में पूरी तरह नहाये हुए थे और चमचमा रहे थे। बच्चे कॉमिक पत्रिकाएँ पढ़ रहे थे और उनकी माँ सो चुकी थी।

‘हमें जॉर्जिया में रुके बिना सपाटे से निकल चलना चाहिए, बिना समय बरबाद किये’, जॉन वैसली ने कहा।

‘अगर मैं तुम्हारी उम्र की होती’, दादी ने कहा, ‘तो अपनी पैदाइश की जगह के बारे में इस तरह से न कहती। टेनैसी में पर्वत हैं और जॉर्जिया में पहाड़।’

‘टेनैसी यूँ ही ऊलजलूल कूड़े का मैदान है’, जॉन वैसली ने कहा, ‘और जॉर्जिया भी एक बकवास प्रदेश है।’

‘ठीक कहते हो’, जून स्टार ने कहा।

‘हमारे ज़माने में’, दादी ने अपनी नसें-उभरी पतली उँगलियाँ को मोड़ते हुए कहा, ‘बच्चे अपनी पैदाइश की जगह, अपने माँ-बाप और सारी चीज़ों के लिए ज़्यादा सम्मानपूर्वक ढंग से बात करते थे। तब लोग सही करते थे। देखो! उस प्यारे बच्चे को देखो’, उसने एक झोपड़ी के बाहर खड़े नीग्रो बच्चे की ओर इशारा करके कहा-‘‘क्या यह एक सुन्दर तस्वीर नहीं’’ उसने पूछा और उन सबने मुड़कर कार के पिछले शीशे से उस छोटे नीग्रो लड़के को देखा। उसने हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

‘उसने नीचे कुछ पहना नहीं था’, जून स्टार ने कहा।

‘उसके पास कुछ होगा नहीं’, दादी ने समझाया ‘गाँव के काले बच्चों के पास हमारी तरह चीज़ें नहीं होतीं। अगर मैं उसका चित्र बना सकती तो ज़रूर बनाती’-उसने कहा।

बच्चों ने मज़ाकिया ढंग से एक-दूसरे की ओर देखा।

दादी ने छोटे बच्चे को गोद में लेने का प्रस्ताव रखा और बच्चों की मां ने उसे अगली सीट से पीछे दे दिया। दादी ने उसे घुटनों पर बिठाया और उसे उछाला और उन चीजों के बारे में बताने लगी जिनके बीच से वह गुजर रहे थे। उसने अपनी आँखें घुमाईं, चेहरा चढ़ाया और अपना झुर्रीदार मुँह उसके चिकने, मासूम चेहरे पर रख दिया। बच्चा उसे रह-रहकर एक खोयी मुस्कान से देखता रहा। वह एक लम्बे रूई के खेत से गुज़रे जिसके बीचो-बीच, बागड़ के अन्दर, पांच-छः क़ब्रें थीं, बिल्कुल किसी द्वीप की तरह। ‘उस क़ब्रिस्तान को देखो’ - दादी ने उसकी ओर संकेत करते हुए कहा। ‘यह पहले मुर्दों को दफ़न करने की जगह-क़ब्रिस्तान था। इसका सम्बन्ध बागीचे से था।’

‘बाग़ीचा कहां है?’ जॉन वैसली ने पूछा।

‘हवा के साथ उड़ गया’, दादी ने कहा- ‘हा! हा।’

बच्चे जब साथ लायी सारी कॉमिक्स पढ़ चुके तो उन्होंने लंच निकाल कर खाया। दादी ने अपना खाना खाया और बच्चों को डिब्बा और पेपर-नैपकिन्स खिड़की से फेकने से मना किया। जब करने को और कुछ न बचा तो उन्होंने बाटल चुनकर, बाक़ी दो से, यह अन्दाज़ा लगाने का खेल शुरू कर दिया कि वह क्या शक्ल बना रहा है। जॉन वैसली ने एक गाय की आकृति का सोचा और जून स्टार एक गाय की शक्ल भांप गई और जॉन वैसली ने कहा- ‘नहीं, एक मोटर’ और जून स्टार ने कहा कि वह बेईमानी कर रहा है, और वह दोनों, दादी के इधर-उधर, एक-दूसरे को मारने की कोशिश करने लगे।

दादी ने कहा- अगर वे शांत रहेंगे तो वह उन्हें एक कहानी सुनायेगी। जब उसने कहानी सुनाई तो आंखें मटकाईं, सिर हिलाया और बहुत नाटकीय मुद्रायें बनायीं। उसने कहा कि जब वह एक लड़की थी तो जास्पर, जॉर्जिया के एक सज्जन, मिस्टर एडगर एटकिंस टीगार्डन (ई.ए.टी.) उसे चाहते थे। उसने कहा कि एक सुन्दर एवं सज्जन व्यक्ति थे और यह कि हर शनिवार की दोपहर वह उसके लिए एक तरबूज़ लेकर आते थे जिसमें उनके नाम के प्रारंभिक अक्षर ‘ई.ए.ट’ कटे होते थे। तो एक शनिवार को, उसने कहा, मिस्टर टीगार्डन तरबूज लाये और घर पर कोई था नहीं और वह उसे घर के सामने की पोर्च पर रखकर अपनी बग्घी में जास्पर वापस लौट गए, लेकिन उसे वह तरबूज़ कभी मिला ही नहीं, उसने कहा, क्योंकि एक नीग्रो बच्चे ने जब उस पर ‘ईएट’, ‘ईट’ अर्थात ‘खा जाओ’ लिखा देखा तो उसने उसे खा लिया। यह कहानी सुनकर जॉन वैसली को बेहद गुदगुदी हुई और उसका खिलखिला-खिलखिलाकर बुरा हाल हो गया, लेकिन जून स्टार को कहानी में कोई दम नज़र न आया। उसने कहा- वह ऐसे आदमी से किसी सूरत शादी नहीं कर सकती जो शनिवार को उसके लिए केवल तरबूज़ लेकर आये। दादी ने कहा- अगर वह खुद मिस्टर टीगार्डन से शादी कर लेती तो अच्छा ही होता क्योंकि वह सज्जन व्यक्ति थे और कोकाकोला का स्टॉक, जब वह पहले-पहले निकला था, ख़रीद लिया था और वह कुछ साल पहले ही मरे थे, एक बहुत अमीर आदमी।

वह ‘द् टॉवर’ पर सींक के कबाब के सेंडविचेज के लिए रुके। ‘द टॉवर’, आंशिक, एक पेट्रोल का स्टेशन और डॉन्सिंग हॉल था जो टिमोथी के बाहर ही खुले में था। रेड सैमी बट्स नाम का एक मोटा व्यक्ति उसे चलाता था, और जहां-तहां और सड़कों पर मीलों दूर तक विज्ञापन लगे थे, यह कहते ‘एक बार, रेड सैमी का बाबिक्यो मशहूर रेड सैमी जैसा कोई नहीं। खुशमिज़ाज और सेहतमन्द। अनुभवी! रेड सेमी आपका व्यक्ति है।’

रेड सैमी ‘द टॉवर’ के बाहर नंगी ज़मीन पर अपना सिर एक ट्रक के नीचे डाले लेटा था, जबकि एक भूरा बन्दर लगभग फुट-भर ऊंचा, एक छोटे चायनाबैरी दरख़्त से

बंधा था। बच्चों को कार से उतरकर अपनी ओर दौड़ते देखते ही बन्दर दरख़्त और फिर उसकी सबसे ऊँची शाख़ पर जा बैठा था।

अन्दर, ‘द टॉवर’ एक लम्बा अंधेरा कमरा था जिसके एक किनारे काउण्टर था और दूसरे किनारे मेजें और बीच में नाचने की जगह। वह सब एक मेज पर बैठ गए और रेड सैम की पत्नी जो एक लम्बी, भूरे रंग की स्त्री थी जिसके बाल और आंखों की रंगत उसकी चमड़ी की रंगत से कम भूरी थी, आकर उनका आर्डर ले गई। बच्चों की माँ ने एक सिक्का मशीन में डाला और; ‘टेनैसी वाल्ज’ बजने लगा और दादी ने कहा- यह धुन सुनकर हमेशा उसका नाचने को मन होता है। उसने बैली से पूछा, क्या वह नाचना चाहेगा, लेकिन वह केवल घूर कर चुप ही रहा। उसके स्वभाव में वह चंचलता और खुशमिज़ाजी नहीं थी जो उसकी माँ में थी और यात्रा करते हुए वह नर्वस हो जाता था। दादी की भूरी आँखें बेहद चमकदार थीं। कुर्सी में बैठे-बैठे अपना सिर दायें-बायें हिलाते हुए वह यूँ दिखावा कर रही थी जैसे नाच रही हो। जून स्टार ने कहा, कुछ ऐसा बजाओ जिस पर मैं नाच सकूँ, इसलिए बच्चों की माँ ने एक और सिक्का डाला और एक तेज़ गति की धुन बजने लगी और जून स्टार फ़र्श पर निकलकर नाच के क़दम उठाने और थिरकने लगी।
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #4  
Old 04-30-2017, 09:08 AM
kaamdev kaamdev is offline
Senior Member
 
Join Date: Jan 2012
Posts: 219,638
Default प्रणय-चिह्नं

:repped: :repped: +25
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #5  
Old 04-30-2017, 09:09 AM
goldfish goldfish is offline
Senior Member
 
Join Date: Dec 2007
Posts: 278,784
Default प्रणय-चिह्नं

प्रणय-चिह्नं
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #6  
Old 04-30-2017, 09:10 AM
aamjayadakha aamjayadakha is offline
Senior Member
 
Join Date: Feb 2009
Posts: 278,209
Default प्रणय-चिह्नं

‘कितनी प्यारी बच्ची है ना?’ रेड सैम की पत्नी ने काउण्टर पर से झुककर कहा- ‘तुम हमारी बेटी बनोगी?’

‘नहीं, बिल्कुल नहीं बनूँगी’, जून स्टार ने कहा- ‘मैं ऐसी उजाड़ जगह में नहीं रह सकती। चाहे कोई बहुत पैसा दे, तो भी!’ और वह दौड़कर मेज़ पर लौट गई।

‘कितनी प्यारी है ना औरत ने दोहराया, सहजता से अपना मुँह फैलाकर।

‘तुम्हें शर्म नहीं आती?’ दादी ने डांटा।

रेड सैम ने आकर पत्नी से कहा कि वह काउण्टर पर समय बरबाद करने के बजाय उन लोगों का आर्डर जल्दी पूरा करे। उसकी ख़ाकी पतलून उसके कूल्हों की हड्डी तक पहुँचती थी और पेट कमीज़ के अंदर किसी पोटली की तरह हिलता था। वह पास की टेबिल पर आकर बैठ गया और सिसकी और गुनगुनाहट की मिली-जुली आवाज़ें निकालीं।

‘आप कुछ नहीं कर सकते’ उसने कहा- ‘आप कुछ भी नहीं कर सकते’, उसने अपने सुर्ख चेहरे का पसीना मैली दस्ती से पोंछा- ‘आजकल आप किसी पर भरोसा नहीं कर सकते’, उसने कहा- ‘क्या मैं ग़लत कह रहा हूँ

‘लोग सचमुच वैसे नहीं रहे जैसे हुआ करते थे’, दादी ने कहा।

‘पिछले हफ्ते दो लोग यहाँ आये’, रेड सैमी ने कहा, ‘एक क्राइस्लर गाड़ी चलाते हुए। एक पुरानी कबाड़ा कार थी, लेकिन ठीक थी और वह लोग भी मुझे ठीक-ठाक लगे। कहने लगे वह मिल पर काम करते हैं, और आपको मालूम है, मैंने उन्हें पेट्रोल उधार ले जाने दिया मैंने ऐसा क्यों किया

‘क्योंकि तुम एक भले आदमी हो’, दादी ने फ़ौरन कहा।

‘हाँ, शायद’, रेड सैम ने इस तरह कहा जैसे इस जवाब से डर गया हो।

उसकी पत्नी आर्डर ले आई, पाँच प्लेटें एक साथ बिना ट्रे के, हाथों में दो-दो और एक उसकी बांह पर सधी हुई। ‘ईश्वर की इस हरी-भरी दुनिया में कोई एक ऐसा नहीं जिस पर आप भरोसा कर सकें’, उसने कहा- ‘और इसमें से मैं किसी का भी नाम नहीं निकाल सकती, कोई-किसी का भी नहीं’ उसने रेड सैमी की ओर देखते हुए दोहराया।

‘तुमने उस अपराधी, ‘मिसफ़िट’ के बारे में भी पढ़ा जो जेल से भाग निकला है ‘दादी ने पूछा।

‘मुझे जरा भी आश्चर्य नहीं होगा अगर वह यहाँ धावा बोल दे’, औरत ने कहा- ‘अगर उसे यहाँ इस जगह के होने का पता भी चल गया, तो मुझे उसे यहाँ देखकर बिल्कुल आश्चर्य नहीं होगा। अगर उसने सुन लिया कि दो पैसे भी यहाँ हैं, तो मुझे यह देखकर आश्चर्य हो ही नहीं सकता कि वह...’

‘बहुत हो गया’, रेड सैम ने कहा-, ‘जाओ इन लोगों के लिए कोका-कोला लाओ’, और औरत बाक़ी आर्डर लाने के लिए चली गई।

‘भला आदमी मुश्किल में मिलता है’ रेड सैमी ने कहा- ‘हर चीज ख्वार होती जा रही है। मुझे वे दिन याद हैं जब बिना ताला लगाये घर छोड़ा जा सकता था। अब नहीं।’

वह और दादी अच्छे ज़माने की बातें करते रहे। बूढ़ी महिला ने कहा कि उसकी राय में यूरोप पूरी तरह मौजूदा बिगाड़ के लिए दोषी था। उसने कहा कि यूरोप इस तरह व्यवहार करता है, जैसे सब पैसों के बने हों और रेड सैम ने कहा, कुछ भी कहना व्यर्थ है और वह बिल्कुल सही कर रही थी। बच्चे दौड़कर बाहर सफेद धूप में चले गये थे। और दरख्त की घनी शाखों में बन्दर को देखने लगे थे। बन्दर अपने शरीर से पिस्सू पकड़ने और सावधानी से दांतों के बीच चबाने में व्यस्त था जैसे वे कोई स्वादिष्ट चीज़ हों।

गर्म दोपहर में वह लोग फिर रवाना हुए। दादी झपकियाँ लेती और रह-रहकर अपने ही ख़र्राटों की आवाज से जागती रही। टूमसबोरो से कुछ पहले वह जाग उठी और एक पुराने बाग़ीचे को याद करने लगी जो उसने अपनी जवानी में एक बार देखा था। उसने कहा, उस घर के सामने छः सफेद खम्भे थे, और बलूत के दरख्त लगा लम्बा रास्ता था जो घर तक जाता था, और सामने दो लकड़ी की जाफ़री लगे कुंज थे जहां आप अपने चाहने वाले के साथ बाग में चहलकदमी के बाद बैठ सकते थे। उसने उस सड़क को ठीक से याद किया जो वहां पहुंचने के लिए मुड़ती थी। वह समझती थी कि बैली एक पुराने मकान को देखने के लिए समय बरबाद करना नहीं चाहेगा, लेकिन जितना-जितना वह उस जगह की बात कर रही थी, उतनी ही उसे एक बार फिर से देखने की तमन्ना और यह जानने की इच्छा कि क्या वह जाफ़री लगे कुंज अभी भी वहाँ थे, बढ़ती जा रही थी। ‘उस घर में एक छिपा हुआ तहखाना था’, उसने चालाकी से कहा, सच बताने के बजाए यह सोचते हुए कि काश! वह सच बता रही होती- ‘जिसके बारे में कहा जाता था कि उसमें सारे परिवार की दौलत छिपी थी, लेकिन वह किसी को भी मिली नहीं...’

‘हे!’ जॉन वैसली ने कहा- ‘चलो हम चलकर देखें। हम ढूँढ लेंगे। हम कोशिश करेंगे तो मिल जाएगी। वहाँ कौन रहता है किस जगह से मुड़ना होता है पापा, क्या हम वहीं नहीं चल सकते

‘हमने कभी कोई तहख़ाने वाला घर नहीं देखा!’ जून स्टार ने चीख कर कहा- ‘हमें तहख़ाने वाले घर देखना चाहिए! पापा, क्या हम जाकर तहख़ाने वाला घर नहीं देख सकते!’

यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं, मुझे मालूम है’, दादी ने कहा। ‘बीस मिनिट से ज़्यादा नहीं लगेंगे।’

बैली सीधा आगे देख रहा था। उसका जबड़ा किसी घोड़े की नाल सा भिचा था। ‘नहीं’ उसने कहा।

बच्चों ने चीख़ना-चिल्लाना शुरू कर दिया कि वह तहखाने वाला घर देखना चाहते हैं। जॉन वैसली ने सामने वाली सीट के पीछे ठोकर लगाई और जून स्टार अपनी मां के कांधों पर झूल गई और उसके कान में झुँझलाहट के साथ रिरियाते हुए कहा कि उन्हें छुट्टियों में भी कभी कुछ मज़ा नहीं करने दिया जाता, कि वह कभी भी वह नहीं कर पाते जो वह करना चाहते हैं। छोटा बच्चा चीखने लगा और जॉन वैसली ने सामने वाली सीट की पुश्त में इतनी कसकर किक मारी कि उसके बाप को चोट का एहसास अपने गुर्दे में हुआ।

‘ठीक है।’ वह चिल्लाया और कार को किनारे करके रोक दिया।

‘तुम सब चुप करोगे? क्या तुम सब एक सैकिंड को चुप करोगे? अगर चुप नहीं करोगे तो हम कहीं भी नहीं जायेंगे।’

‘इन बच्चों के लिए अच्छा सबक होगा’, दादी बुदबुदायी।

‘ठीक है’, बैली ने कहा, ‘लेकिन यह समझ लोः यह आख़री बार हम इस तरह किसी चीज़ के लिए रुक रहे हैं। यह पहली और अन्तिम बार है।’

‘वह कच्ची सड़क जिस पर मुड़ना है लगभग मील-भर पीछे रह गई’, दादी ने निर्देश दिया- ‘हम लोग निकल रहे थे तो मैंने उसे पहचान लिया।’

‘कच्ची सड़क,’ बैली कराहा।

वापस मुड़कर जब वह उस कच्ची सड़क की ओर जा रहे थे, दादी उस घर की ओर बातें याद करती रही, सामने के दरवाजे में जड़ा खूबसूरत शीशा और हॉल के अन्दर का सुन्दर शमादान। जॉन वैसली ने कहा- तहख़ाना शायद आतिशदान में होगा।

‘तुम इस घर के अन्दर नहीं जा सकोगे,’ बैली ने कहा, ‘तुम्हें नहीं मालूम वहां कौन रहता है।’

‘जब तक आप लोग सामने खड़े होकर बातचीत करोगे, मैं लपक कर पीछे की खिड़की से अन्दर चला जाऊँगा’ जॉन वैसली ने सुझाया।

‘हम सब कार के अन्दर ही रहेंगे’, उसकी माँ ने कहा।

वे कच्ची सड़क पर उतर गये और कार लाल गुबार उड़ाती लहराती आगे बढ़ी। दादी ने याद किया वह ज़माना जब पक्की सड़कें नहीं होती थीं और तीस मील की यात्रा पूरे दिन भर की मेहनत होती थी। कच्ची सड़क ऊंची-नीची थी, उसमें रह-रहकर कटाव, और ख़तरनाक पुलियाँ और अंधे मोड़ थे। एकदम वह पहाड़ पर होते, नीचे दरख्तों की फुनगियों को दूर-दूर तक फैला हुआ देखते, अगले ही क्षण गाड़ी गहरी घाटी उतर रही होती जिसके किनारे लाल धूल में अटे दरख्त उनको तकते खड़े होते।

‘उस जगह को बस अब आ ही जाना चाहिए’, बैली ने कहा- ‘नहीं तो मैं गाड़ी वापस मोड़ने वाला हूँ।’

सड़क देखकर लग रहा था उस पर महीनों से कोई नहीं गया था।

‘अब ज्यादा दूर नहीं है’ दादी ने कहा और जैसे ही उसने यह कहा एक भयावह ख़्याल उसके दिमाग़ में आया। ख़्याल इतना शर्मिन्दा करने वाला था कि उसका चेहरा लाल हो गया और आंखें फैल गयीं और उसके पैर उछल गये जिससे बगल में रखा उसका बैग उलट-पलट गया। जैसे ही बैग हिला वह समाचार-पत्र जो उसने नीचे डलिया के मुँह पर रखा हुआ था, एक गुर्राहट के साथ ऊपर उठा और पिटी सिंग, बिल्ले, ने बैली के काँधे के ऊपर छलांग लगा दी।

बच्चे फ़र्श पर फिक गये थे और उनकी माँ, सबसे छोटे बच्चे को पकड़े दरवाजे के बाहर ज़मीन पर बूढ़ी महिला अगली सीट पर पहुँच गयी थी। कार ने एक कुलाट खाई थी और दाहिने-बाजू-ऊँचे, सड़क के किनारे एक खड्ड में जा गिरी थी। बैली ड्राईवर की सीट में ही बैठा रहा था और बिल्ला उसका चौड़ा चेहरा और नारंगी नाक, सफेद किसी आंख फोड़ टिड्डे की तरह उसकी गर्दन से चिपका रहा था।

जैसे ही बच्चों को लगा कि वह अपने हाथ-पाँव चला सकते हैं, वह झपटकर कार के बाहर निकल आये, चिल्लाते हुए, ‘हमारा एक्सीडेन्ट हो गया।’ कार के डैशबोर्ड के नीचे सिमटी दादी, दिल में दुआ कर रही कि उसे चोट आई हो ताकि बैली के गुस्से का उसे फ़ौरन सामना न करना पड़े। वह भयावह ख़्याल जो उसे एक्सीडेन्ट से पहले आया यह था कि वह घर जिसे वह याद कर रही थी जॉर्जिया में नहीं बल्कि टेनैसी में था।

बैली ने बिल्ले को दोनों हाथों से पकड़कर गर्दन छुड़ाई थी और कार की खिड़की से फेक कर उसे एक चीड़ के दरख्त पर दे मारा था। फिर वह कार के बाहर निकलकर बच्चों की मां को ढूँढने लगा। वह लाल खड्ड के कोने से टेक लगाये ऊँची आवाज़ में रो रहे, छोटे बच्चे को लिये बैठी थी, लेकिन सिर्फ़ उसके चेहरे पर घाव आया था और कंधे में अधिक चोट लगी थी। ‘हमारा एक्सीडेन्ट हो गया।’ बच्चे खुशी से दीवाने होकर चिल्ला रहे थे।

‘लेकिन कोई मरा नहीं।’ दादी को कार से लंगड़ाते हुए बाहर निकलते देखकर जून स्टार ने निराशा से कहा। उसका हैट सिर पर ही लगा था, लेकिन सामने की बाड़ उलट कर सीधी खड़ी हो गयी थी और नीले फूलों का गुच्छा बाजू में झूल रहा था। बच्चों को छोड़कर एक्सीडेंट के झटके से उबरने के लिए सब लोग खड्ड में ही बैठ गए। सब काँप रहे थे।

‘हो सकता है कोई कार गुज़रे’ बच्चों की माँ ने फटी आवाज़ में कहा।

‘लगता है मुझे कहीं चोट आई है’ दादी ने अपनी पसलियां दबाते हुऐ कहा, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। बैली की बत्तीसी बज रही थी। उसने पीली स्पोर्ट-शर्ट पहन रखी थी जिस पर चटकीले हरे रंग के तोते बने थे और उसका चेहरा भी शर्ट-सा पीला हो रहा था। दादी ने तय किया कि वह, घर, टेनैसी में होने की बात नहीं कहेगी।

सड़क कोई दस फीट ऊपर थी और वह केवल दूसरे किनारे लगे दरख्तों की चोटियाँ देख सकते थे। उस खड्ड के पीछे जिसमें वह बैठे थे, जंगल था ऊँचा और अंधेरे में डूबा, और और घना। कुछ मिनिट बाद पहाड़ पर कुछ दूर उन्होंने एक कार को देखा, धीरे-धीरे आते जैसे उसमें बैठे लोग उन्हें देख रहे हों। दादी खड़े होकर अपने दोनों हाथ नाटकीय ढंग से उनका ध्यान खींचने को हिलाने लगी। कार धीमी गति से बढ़ती रही, एक मोड़ पर ओझल हुई और फिर दिखाई दी, धीमी गति से चलती, उसी पहाड़ पर जिस से वह आये थे। वह एक बड़ी काली रंग की टुची हुई अरथी जैसी कार थी। उसमें तीन आदमी थे।
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #7  
Old 04-30-2017, 09:12 AM
desiman7 desiman7 is offline
Senior Member
 
Join Date: Jan 2012
Posts: 217,865
Default प्रणय-चिह्नं

ऐसा सुखी भी कौन होगा, जैसा कि उस समय मैं था : एक ओर प्रिया तैयार खड़ी थी - ‘ले चल जहाँ चाहे.’ और दूसरी ओर मां बाहें फैलाए खड़ी थी- ‘ले आ बेटा, जिसे चाहे.’

“जी तो चाहता है,” मैं बोला, “तुम्हें अपनी मां के पास ले चलूं.”

“मुझे अपने लिए रिजर्व कल लेना चाहते हो?” वह मुसकराई.

“हाँ! ताकि फिर तुम कहीं और न जा सको.”

“अच्छा, इस कार्यक्रम को कुछ दिनों के लिए अभी स्थगित ही रखो,” वह बोली, “मुझे एक काम याद आ गया है.”

मैं एक सहृदय प्रेमी के समान उसकी बात मान गया और वह चली गई. गई तो ऐसी गई कि भगवतीचरण वर्मा के उपन्यास का नाम हो गई, अर्थात् – वह फिर नहीं आई.

तब समझ नहीं पाया था, पर आज मैं समझता हूँ कि वह क्या था. वस्तुतः श्रृंगार और वात्सल्य का मिश्रण बड़ी भयंकर भूल है. श्रृंगार और वात्सल्य का संबंध – बहू और सास का संबंध है. काव्य-शास्त्र की इसी भ्रांति में मार खा गया. भला बहू जाकर सास के पास रहना क्यों चाहेगी?

नारी-मनोविज्ञान का मेरा ज्ञान खासा अधकचरा और आउट-ऑफ़-डेट है. उसके इस वाक्य का अर्थ दस वर्ष बाद मेरी समझ में आया, और वह भी यारों के समझाने पर आया. वह कह रही थी कि किसी होटल में ले चलो, किसी रेस्ट्रां में ले चलो, किसी थियेटर में ले चलो, किसी पार्क में ले चलो. मैंने उसके सम्मुख सास के पास ले चलने का प्रस्ताव रख दिया. साहित्य के रसराज श्रृंगार रस के विषय में पढ़-पढ़ाकर आंखें फोड़ लीं और जीवन में व्यवहार का अवसर आया तो वात्सल्य जोर मार गया. यह रसों की त्रासदी भी...
पर मेरे साथ प्रेम के क्षेत्र में एक यही त्रासदी हुई हो – ऐसी बात नहीं है. ऐसी कुछ त्रासदियाँ और भी हैं.
हम कालेज के टूर पर निकले हुए थे. वह अकसर मेरे साथ ही घूमती थी. मेरे साथ ही बातें करती थी. अब बस में भी वह मेरे साथ ही बैठी थी. थोड़ी देर तो मेरी टाई और मेरे बालों की प्रशंसा करती रही, फिर बोली, “मुझे नींद आ रही है. जरा सीधे होकर बैठ जाओ.”
मैंने भौंचक हो उल्लू के समान उसकी ओर देखा - ‘सीधे बैठ जाओ’ तक तो ठीक था. मां भी यही कहा करती थी कि मैं झुककर बैठता हूँ. ऐसे में कमर झुक जाती है. मुझे सीधे होकर बैठना चाहिए. बाद में ड्रिल-मास्टर से लेकर क्लास-टीचर तक सबने यही कहा था - ‘सीधे बैठो !’ आज भी वह यही चाहती थी कि मैं सीधा बैठा करूं तो हर्ज क्या है ? दिन भर के घूमने-फिरने से थका हुआ तो था, पर उसकी बात मानकर सीधे बैठना श्रेयस्कर था. किंतु उसकी नींद से मेरे सीधे बैठने का क्या सम्बन्ध ? मन तर्कशास्त्र की ओर भागने की जगह पर काव्यशास्त्र की ओर भागा. समझ गया कि यह असंगति अलंकार है- कारण कहीं होता है, कार्य कहीं और होता है. नींद उसे आ रही थी और सीधा मुझे बैठना था. असंगति अलंकार का ऐसा सुन्दर, जीवन्त और आधुनिक उदाहरण सामने देख मैं गद् गद हो उठा. मेरा ध्यान उसकी ओर से हटकर परीक्षा की ओर चला गया. परीक्षा में यदि असंगति अलंकार के विषय में पूछा गया तो यही उदाहरण लिखूंगा. परीक्षक भी चित हो जाएगा...

अभी तो मेरा ध्यान परीक्षा-फल और उसके आधार पर मिलने वाली नौकरी तक जाता, पर उसकी हरकत से मेरी चिन्तन-प्रक्रिया में बाधा पड़ी, विचारों की शृंखला टूट गई और मेरा ध्यान पलट आया. हुआ यह कि मेरे सीधे बैठते ही उसने अपना सिर मेरे कंधे से टिका दिया था और सोने के लिए आँखें बन्द कर ली थीं...

मेरा मस्तिष्क काव्यशास्त्र के खेत को चरना छोड़, सरपट भागता हुआ नागरिकशास्त्र में जा घुसा ! यह कैसा शिष्टाचार है. इसे नींद आई है तो मैं तन कर रात-भर ड्यूटी पर बैठा रहूँ कि कहीं मेमसाब की नींद में विघ्न न पड़े. यह कैसा समाज है – स्वार्थी. केवल अपनी ही सुविधा का ध्यान है, दूसरे के आराम की तनिक भी चिन्ता नहीं. एक आदमी को आराम से सोने के लिए दूसरे का कंधा चाहिए, और दूसरे को जरा ढीले होकर बैठने की भी सुविधा नहीं...

पर मैं न तो उसे इस अशिष्टता के लिए फटकार सका, न नागरिक शास्त्र पर व्याख्यान दे सका. मरे कंधे से टिकी वह बड़ी प्यारी लग रही थी. मन भी पिघल रहा था और वह कंधा भी, जिससे लगी वह सो रही थी. दूसरा कंधा अपने भाग्य पर आठ-आठ आँसू रो रहा था... पर तभी मेरी आत्मा ने मुझे धिक्कार दिया, ‘दुष्ट ! तू मनुष्य कहलाने का अधिकारी नहीं है. एक अबला नारी, सैर-सपाटे से थकी-हारी, यदि तेरे सहारे से कुछ विश्राम कर लेना चाहती है तो तेरे मन में दूषित विचारों का मेला लग रहा है. तेरे घर में मां-बहन नहीं हैं क्या ? यह मानव-तन क्यों पाया है तूने, यदि कष्ट में किसी की तनिक सहायता भी तू नहीं कर सकता...’

आत्मा के धिक्कार का तत्काल प्रभाव हुआ. मेरे भीतर का सोया हुआ सामाजिक कार्यकर्ता जाग उठा और प्रेमी पुरूष सो गया. मैंने अपनी चेतना को जगाया और उसे याद दिलाया – यह शरीर दूसरों की सेवा के लिए ही था. विशेषकर यह कंधा तो बना ही इसीलिए था. मैंने वहीं बैठे-बैठे भीष्म प्रतिज्ञा की कि यह कंधा आज से जन-कल्याण के लिए ही अर्पित है- चाहे किसी कन्या के सोने के काम आए, या किसी की अर्थी उठाने के. आज से जो भी मेरा कंधा मांगेगा- यह उसी को अर्पित होगा...

पर उसे शायद नींद नहीं आ रही थी. वह सीधी होकर बैठ गई और ध्यान से मेरा चेहरा देखने लगी. कदाचित् देख रही थी कि उसके द्वारा मेरे कंधे का उपयोग मुझे बुरा तो नहीं लगा. सामान्यतः तो ऐसी हरकत मुझे बुरी ही लगती है. मैं अपना शेविंग सेट तो किसी और को देता नहीं, अपना कंधा कैसे दे देता ! पर उस क्षण मेरी आत्मा उदात्तता और उदारता के ऊँचे-से-ऊँचे शिखरों पर उड़ रही थी, इसलिए उसके द्वारा अपने कंधे के इस दुरूपयोग के लिए मैंने अपनी अप्रसन्नता नहीं जताई. बड़ी उदारता से बोला, “सो जाओ. सो जाओ. मैं बुरा नहीं मानूंगा.”

उसकी आँखों में मेरे प्रति प्रशंसा का भाव नहीं जागा. वह मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मैं आदमी न होकर छछूंदर या ऊदबिलाव होऊँ. फिर स्वयं को बलात् संयत कर बोली, “मुझे नींद नहीं आ रही.”
जी में आया, उससे कहूँ कि नींद नहीं आ रही तो थोड़ी देर के लिए किसी और सीट पर जा बैठे, मैं ही अपनी कमर सीधी कर लूँ. पर तत्काल ही मेरे विवेक ने मुझे धिक्कारा. वह स्त्री है, कोमल है. मैं पुरूष हूँ, कठोर हूँ. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए-

“क्यों ? नींद क्यों नहीं आ रही ?” मैंने पूछा.

“सिर में कुछ दर्द है.” वह बोली, “लगता है, ज्वर भी हो गया है. तुम मेरा सिर दबा दोगे ?”

इच्छा हुई कि उसे बता दूँ कि अभी-अभी मैंने स्वयं को दूसरों के कष्ट-निवारण के लिए समर्पित किया है और थोड़ा-बहुत ज्ञान अपने जीवन के आदर्शों का भी दे दूं. पर उसके सामने जुबान खुल नहीं पाई. मन में जाने कैसी गुदगुदी हो रही थी. वह मुझसे अनुचित लाभ उठा रही थी, फिर भी अच्छी लग रही थी.

हल्के से बोला, “दबा दूंगा.”

“थैंक यू.” वह बोली.

और इससे पहले कि मैं कुछ समझ सकता, वह अधलेटी-सी हो गई और अपना सिर मेरी गोद में रख दिया. मुझे अपनी दादी और अपने पिताजी याद आ गए. बचपन से ही वे लोग मुझसे सिर दबवाते रहे हैं. मेरी घंटे-घंटे की मेहनत के पश्चात् हल्की-सी प्रशंसा कर देते, “तुम बहुत अच्छा सिर दबाते हो.”
अपनी गोद में लेटी वह मुझे अपनी दादी लग रही थी. मैं अब इसका सिर दबाता रहूँगा और यह आराम से सो जाएगी. मेरी दादी भी यही किया करती थी. मैं उसका सिर दबाता रहता और वह खर्राटे लेती रहती. मेरी कलाइयाँ दुःख जातीं और उसके कान पर जूँ तक नहीं रेंगती. अपने कोमल और भीरू बच्चे को इस शोषण से बचाने के लिए मेरी मां अपनी सास से डरती-डरती, दरवाजे के पीछे से ही मुझे उठ आने का इशारा करती तो मैं उठने का साहस करता. पर मेरे उठते ही किसी जादू से मेरी सोई हुई दादी की नींद उचट जाती और वह करवट बदल कर कहती, “कहाँ जा रहा है ?”

मैं चिंतित हो उठा : मैं सिर दबाता रहा और यह सो गई, तो मेरा क्या होगा ? यहाँ तो मेरी मां भी नहीं है जो अपनी सास के पंजे से मुझे छुड़ाने का प्रयत्न करती और यह मेरी दादी की दादी मेरी गोद में सिर रखे आराम से लेटी हुई थी...

मैंने मन को समझाया. अपने आदर्शों को याद किया और उसका सिर दबाना आरम्भ किया. पर थोड़ी ही देर में मैं अपने मन के पाप को पहचानने लगा. उसका सिर दबाते-दबाते मेरी अंगुलियाँ बहक-बहक कर उसके गालों तक जाने लगी थीं. मैंने भयभीत दृष्टि से उसकी ओर देखा: कहीं उसे मालूम तो नहीं हो गया ? पर नहीं ! उसकी नींद, मेरी दादी की नींद से बहुत भिन्न थी. उसे मालूम नहीं हो रहा था कि मैंने उसके गालों को छुआ था. वह बड़ी सन्तुष्ट मुद्रा में, आँखें बन्द किए निश्चिंत पड़ी थी.

मैंने अपने मन को धिक्कारा : एक पराई स्त्री ज्वरग्रस्त हो, उसके सिर में पीड़ा हो रही हो, वह मुझसे सहायता मांग रही हो और मुझ में पाप जाग रहा है. धिक्कार है मुझे ! किसी की विपत्ति का लाभ उठाना कहाँ की मानवता है ! ... बस, इतना ही धिक्कार पर्याप्त हुआ. फिर मेरे सात्विक मन में तनिक भी पान नहीं जागा. मैं पूरी निष्ठा से उसकी दवा करता रहा और वह चुपचाप पड़ी रही. पर जब उसकी नींद मेरी दादी की नींद से भी लम्बी हो गई और मैं रोगी की सेवा-सुश्रूषा से ऊब गया तो सहायता के लिए मैंने अपने साथियों की ओर याचना-भरी दृष्टि से देखा. किन्तु, उनमें से किसी को भी मेरी स्थिति पर दया नहीं आई, न लड़कों को, न लड़कियों को (कितना कठोर है यह समाज और कितने दुष्ट होते हैं लोग.) उलटे वे लोग परिहास की मुद्रा में मुसकराते जा रहे थे. अन्ततः मुझे कहना ही पड़ा, “भई ! कोई आ जाओ. इसकी तबीयत ठीक नहीं है.”

पर तभी वह उठ कर सीधी बैठ गई. घूर कर यूँ देखा, जैसे मेरी कठोर भर्त्सना करने वाली हो. किन्तु वह इतनी कृतघ्न कैसे हो सकती थी ? क्रोध में भी उसके मुख से मेरे लिए प्रशंसा का वाक्य निकला, “तुम्हें काव्यशास्त्र ही समझ में आ सकता है.”

मुझे यह अधूरी प्रशंसा अच्छी नहीं लगी. आत्मप्रशंसा को दोष मानते हुए भी शालीनता की सीमा के भीतर से बोला, “नहीं, भाषा-विज्ञान में भी अधिकतम अंक मेरे ही थे.”
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #8  
Old 04-30-2017, 09:12 AM
rocki rocki is offline
Senior Member
 
Join Date: Jan 2012
Posts: 218,230
Default प्रणय-चिह्नं

वह ठीक उनके ऊपर आकर रुक गयी, और कुछ मिनिट तक ड्राइवर टकटकी लगाये सधे, भावहीन ढंग से नीचे, जहाँ वे बैठे थे, देखता रहा। वह कुछ बोला नहीं। फिर उसने मुड़कर बाकी दो लोगों से कुछ कहा और वह कार के बाहर आ गए। उनमें एक मोटा लड़का था, काली पतलून और लाल शर्ट पहने जिस पर रूपहले रंग का घोड़ा छपा हुआ था। उसने दायें ओर घूम-फिर कर ताका-झांका और उसका मुंह थोड़ा हँसी से खुल गया। दूसरे ने खाकी पतलून और नीली धारी का कोट पहना था और सिर पर खाकी हैट कुछ इस तरह झुका कर लगाया था कि उसका ज़्यादा चेहरा छिप गया था। वह धीरे-धीरे चलता बायीं ओर आकर खड़ा हो गया। दोनों में से कोई भी नहीं बोला।

ड्राइवर कार से निकल कर बाजू में खड़ा हो गया था, और नीचे उनकी ओर देख रहा था। वह बाकी दो से उम्र में ज़्यादा था। उसके बाल सफेद होना शुरू हो गए थे और उसने चांदी के फ्रेम का चश्मा लगाया हुआ था जिससे वह कोई बुद्धिजीवी लगता था। उसका लम्बा चेहरा झुर्री पड़ा था और उसने कोई कमीज या बनियान नहीं पहनी थी। वह तंग, नीली जींस पहने हुए था और हाथों में एक काला हैट और बन्दूक पकड़े हुए था। दोनों लड़कों के पास भी बन्दूकें थीं।

‘हमारा एक्सीडेंट हो गया!’ बच्चे चिल्लाये।

दादी को अजीब सा लगा जैसे वह उस चश्मा लगाये आदमी को पहचानती हो। उसका चेहरा इतना जाना-पहचाना था कि ज़िन्दगी भर वह उसे जानती रही हो, लेकिन वह कौन था, याद नहीं कर पा रही थी। वह कार से चलकर सावधानी से पैर जमाता, खड्ड में उतरने लगा। कत्थई और सफेद जूते बिना मोजे के पहने हुए था और टखने उसके लाल और दुबले थे। ‘गुड आफ्टरनून’ उसने कहा। ‘लगता है आप लोग उलट गए।’

‘हमने दो कुलाटें खायीं।’ दादी ने कहा।

‘एक’, उसने ठीक किया- ‘हम खुद देख रहे थे। हिराम, देखो इनकी कार चालू है’, उसने धीने से खाकी हैट लगाए लड़के से कहा।

‘तुम्हारे हाथ में बन्दूक क्यों है?’ जॉन वैसली ने पूछा- ‘इस बन्दूक से तुम क्या करोगे?’

‘मैडम,’ आदमी ने बच्चों की माँ से कहा, ‘अपने बच्चों को पास बिठाने का कष्ट करेंगी। बच्चे मुझे नर्वस करते हैं। मैं चाहता हूं तुम सब लोग जहाँ हो वहीं बैठ जाओ।’

‘हम क्या करें यह तुम हमें क्यों बता रहे हो?’ जून स्टार ने पूछा।

उनके पीछे दरख्तों की कतारें, अंधेरे, खुले मुंह की तरह जबड़े खोले खड़ी थीं।

‘इधर आ जाओ’, उनकी माँ ने कहा।

‘देखो बात यह है!’ एकदम बैली ने कहा, ‘हम मुश्किल में फंस गए हैं। हम...’

दादी ने एक चीख मारी। वह लड़खड़ाती अपने पैरों पर खड़ी होकर घूरने लगी थी ‘तुम मिसफ़िट हो!’ उसने कहा- ‘मैं तुम्हें फौरन पहचान गयी थी।’

‘हूँ’ आदमी ने इस तरह मुस्कुराकर कहा जैसे उसे पहचाने जाने की बहुत खुशी हो, ‘लेकिन तुम सबके लिए बेहतर होता, अगर तुमने मुझे पहचाना न होता।’

बैली ने तेजी से मुड़कर अपनी माँ से ऐसा कुछ कहा कि बच्चे भी सहम गए। बूढ़ी महिला रोने लगी और मिसफ़िट का चेहरा लाल हो गया।

‘मैडम’ उसने कहा, ‘तुम परेशान मत हो। कभी-कभी इंसान ऐसी बातें कह जाता है जो उसका मतलब नहीं होता। मुझे नहीं लगता वह तुमसे यह बातें कहना चाहता था।’

‘तुम एक औरत को तो गोली नहीं मारोगे, नहीं ना?’ दादी ने कहा और आस्तीन से एक साफ रूमाल निकालकर अपनी आंखें मलने लगी।

मिसफ़िट ने अपने जूते की नोक से ज़मीन में गड्डा किया, फिर उसे ढंक दिया- ‘ऐसा करते मुझे घृणा होगी’ उसने कहा।

‘सुनो!’ दादी लगभग चीखी, ‘मुझे मालूम है तुम एक भले आदमी हो। तुम्हें देखकर ही लगता है कि तुम्हारी रगों में साधारण खून नहीं है। मुझे मालूम है तुम्हारा सम्बन्ध अच्छे परिवार से है।’

‘जी हाँ’ - उसने कहा, ‘दुनिया से सबसे अच्छे परिवार से-’ मुस्कुराने पर उसके मजबूत सफेद दांत दिखाई देते थे- ‘ऊपर वाले ने मेरी माँ से बेहतर कोई औरत नहीं बनाई और मेरे बाप का दिल तो सच्चा सोना था,’ उसने कहा। लाल कमीज वाला लड़का उनके पीछे आकर खड़ा हो गया था और वह बन्दूक ताने हुए था। ‘इन बच्चों को देखो, बॉबीली’, उसने कहा।

‘तुम जानते हो इनसे मैं नर्वस हो जाता हूँ।’ उसने उन छह लोगों को अपने सामने एक-दूसरे से सट कर बैठा ऐसी नजरों से देखा जैसे वह शर्मिन्दा हो और कुछ कहने को नहीं सूझ रहा हो- ‘आसमान में बादल तक नहीं’- उसने ऊपर देखते हुए टिपप्णी की। ‘सूरज नहीं दिख रहा मगर बादल भी नजर नहीं आ रहे।’

‘हाँ, बहुत सुन्दर दिन है’, दादी ने कहा- ‘सुनो’ वह बोली, ‘तुम्हें खुद को मिसफ़िट (अर्थ अनुपयुक्त) नहीं कहना चाहिए क्योंकि मैं जानती हूं तुम दिल से भले आदमी हो- मैं एक नज़र देखकर ही कह सकती हूँ।’

‘हुश!’, बैली चीखा। ‘हुश! हुश!’ सब चुप हो जाओ और मुझे बात करने दो। वह ऐसी मुद्रा में बैठा था जो तेज दौड़ शुरू करते समय किसी धावक की होती है लेकिन वह अपनी जगह से हिला नहीं।

‘मैं भी यही कहता हूं, मैडम’ मिसफ़िट ने कहते हुए बन्दूक के दस्ते से ज़मीन पर एक छोटा-सा गोल घेरा खींचा।

‘इस कार को ठीक करने में आधा घंटा लगेगा’ हिराम ने गाड़ी के उठे हुए हुड को देखते हुए कहा।

‘ठीक है, लेकिन पहले तुम और बॉबीली’ इसे और उस छोटे बच्चे को साथ लेकर वहाँ जाओ’, मसफ़िट ने बैली और जान वैसली की तरफ इशारा करते हुए कहा- ‘यह बच्चे तुमसे कुछ पूछना चाहते हैं, तुम्हें इनके साथ उधर जंगल में जाने में तकलीफ तो नहीं होगी

‘सुनो’ बैली ने दोबारा कहा, ‘हम बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं। कोई अन्दाजा नहीं लगा सकता उसका’ कहते हुए उसकी आवाज चटक गई। उसकी आंखें उसकी शर्ट पर बने तोते जैसी ही नीली और चमकदार थीं और वह बिना हिले-डुले अपनी जगह बैठा था।

दादी ने हैट का किनारा सीधा करना चाहा जैसे वह भी बैली के साथ जंगल में जा रही हो लेकिन वह टूटकर उसके हाथ में आ गया। वह कुछ देर उसे घूरती खड़ी रही फिर जमीन पर डाल दिया। हिराम ने बैली का कंधा पकड़कर यों झिंझोड़ा जैसे वह किसी बूढ़े आदमी की मदद कर रहा हो। जॉन वैसली ने अपने बाप का हाथ पकड़ लिया और बॉबीली उनके पीछे हो लिया। वह लोग जंगल की ओर बढ़ गए और जैसे ही अंधेरे के करीब आए बैली मुड़ा और एक खाकी, नंगे चनार के तने से टिक कर जोर से चिल्लाया, ‘मैं एक मिनिट में आता हूं, माँ, मेरा इंतजार करना।’

‘फौरन आ जाओ!’ उसकी माँ चीखी लेकिन वह लोग जंगल में खो गए।

‘बैली बेटे!’ दादी ने दर्दनाक आवाज़ में पुकारा लेकिन फौरन ही उसे अहसास हुआ वह अपने सामने ज़मीन पर बैठै मिसफ़िट को देख रही थी- ‘मैं जानती हूं कि तुम एक भले आदमी हो,’ उसने लाचारी से कहा- ‘तुम कोई ऐसे वैसे नहीं हो।’

‘नई, मैं भला आदमी नहीं हूं’ मिसफ़िट ने पलभर ठहर कर यों कहा जैसे वह उसकी बात को अच्छे से सोच लेना चाहता हो, ‘लेकिन मैं दुनिया का सबसे बुरा आदमी भी नहीं। मेरा बाप कहता था मैं अपने भाई-बहनों से हट कर कुत्तों की एक बिल्कुल दूसरी नस्ल से हूं। पता है, मेरा बाप कहता था, ‘अगर कुछ लोग जिन्दगी के बारे में बिना कोई सवाल किये जीते हैं, और दूसरे अपने सवालों का जवाब चाहते हैं तो लड़का दूसरी तरह के लोगों में से है। यह हर चीज में खुद को खपायेगा।’ उसने अपना काला हैट लगा दिया और एकदम नजरें उठाकर जंगल की तरफ यूं देखा जैसे वह फिर से शर्मिन्दा हो। ‘माफ करना आप महिलाओं के सामने मैं बिना कमीज पहले खड़ा हूँ’ उसने हल्के से अपने कंधे झुकाते हुए कहा- ‘जेल से भागने के बाद हमने जो कपड़े पहने हुए थे वह तो जमीन में दफन कर दिए और अब जब तक कुछ बेहतर न मिल जाए, यूं ही काम चला रहे हैं। यह भी कुछ लोगों से मांग कर पहने हुए हैं,’ उसने समझाया।

‘कोई बात नहीं’, दादी ने कहा- ‘शायद बैली के पास सूटकेस में एक ज्यादा कमीज होगी’।

‘मैं अभी और फौरन देखता हूं’; मिसफ़िट ने कहा।

‘वह उसे कहां ले जा रहे हैं बच्चों की माँ ने चीख कर कहा।

‘मेरा बाप खुद बड़ा बदमाश था’; मिसफ़िट ने कहा। ‘कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता था। लेकिन कानून से वह टक्कर नहीं लेता था। उससे वैसे ही निबटने का गुन जानता था।’

‘तुम भी अगर चाहो तो ईमानदार हो सकते हो’ दादी ने कहा- ‘सोचो कितना सुख होगा घर बसाने, आराम की जिन्दगी गुजारने और यह, चिन्ता न करने में कि पूरा समय कोई तुम्हारा पीछा कर रहा है।’

मिसफ़िट पूरे समय बंदूक के दस्ते से ज़मीन खखूरता रहा जैसे वह इसी बारे में सोच रहा हो- ‘हां, कोई न कोई हमेशा पीछे लगा रहता है-’ वह बुदबुदाया।

दादी ने देखा कि उसके हैट के नीचे उभरी कंधे की हड्डियाँ बहुत दुबली थीं क्योंकि वह खड़ी हुई उसे ऊपर से देख रही थी- ‘तुम कभी दुआ मांगते हो उसने पूछा।

उसने अपना सिर हिलाया। वह केवल दोनों कांधों के बीच काले हैट की कुलबुलाहट देख पाई ‘नई’ उसने कहा।

जंगल से एक गोली चलने की आवाज आयी, फिर कुछ ठहर कर दूसरी। फिर सन्नाटा। बूढ़ी महिला का सिर झटके से घूमा। जंगल के दरख्तों में बहती हवा की आवाज ऐसी थी जैसे कोई गहरे अन्दर सांस खींच रहा हो। ‘बैली बेटे!’ उसने चिल्लाकर आवाज दी।

‘कुछ समय के लिए मैंने भजन भी गाये,’ मिसफ़िट ने कहा- ‘सब कुछ ही किया। फौज में नौकरी की, ज़मीन पर भी, समुद्र में भी, अपने देश में और विदेश में, दो बार शादी की, लोगों को दफन करने का काम किया, रेलगाड़ी पर नौकर रहा, जमीन पर हल जोता, समुद्री तूफान में फंसा, एक आदमी को आपनी आंखों के सामने जिन्दा जलते देखा’, और उसने नज़र उठाकर बच्चों की माँ और छोटी बच्ची की ओर देखा, जो एक-दूसरे से चिपटी बैठी थी, उनके चेहरे सफेद और आंखें चुंधियाई हुईं; मैंने एक औरत को कोड़ों से पीटे जाते भी देखा,’ उसने कहा।

‘दुआ’ दादी शुरू हुई- ‘दुआ, दुआ।’

‘जहां तक याद कर सकता हूं मैं कभी बुरा व्यक्ति नहीं था,’ मिसफ़िट ने ऐसी आवाज़ में कहा जैसे सपना देख रहा हो, ‘लेकिन बीच में मुझ से कहीं जाने क्या गलती हो गई कि मुझे सजा दे दी गई। मुझे जिन्दा दफना दिया गया, उसने नज़रें उठाकर दादी की ओर तकते हुए, उसकी तवज्जोह चाही।

‘तभी तुम्हें प्रार्थना शुरू कर देनी चाहिए थी’ उसने कहा- ‘तुमने क्या किया था जिसके लिए तुम्हें पहली बार सजा मिली’?

‘दाहिने मुड़ो, तो एक दीवार, मिसफ़िट ने नजरें उठाकर खुले आसमान की ओर देखते हुए कहा- ‘बायें मुड़ो, तो एक दीवार। ऊपर देखो छत, नीचे देखो फर्श। मैं भूल गया मैडम, मैंने क्या किया था और आज तक याद नहीं कर पाया हूं। कभी-कभी लगता है याद आ रहा है लेकिन आता नहीं।’

‘हो सकता है गलती से तुम्हारे साथ ऐसा कर दिया गया हो’ बूढ़ी महिला ने अनिश्चित स्वर में कहा था।

‘नईं’; उसने कहा- ‘वह गलती नहीं थी। उनके पास मेरे बारे में दस्तावेज थे।’

‘तुमने कुछ चुरा लिया होगा’; उसने कहा।

मिसफ़िट मजाक उड़ाने के अन्दाज से हँसा ‘किसी के पास ऐसा कुछ नहीं था जो मैं लेना चाहता। जहां मुझे सुधारने की मंशा से बन्द किया गया था वहां के बड़े डॉक्टर ने बताया कि असल में मैंने अपने बाप की हत्या की थी लेकिन मुझे मालूम है वह गलत कह रहा था। मेरा बाप उन्नीस कुछ उन्नीस की फ्लू की दवा में मरा था और मेरा उससे कुछ लेना-देना नहीं था। माउन्ट होपवैल चर्च के कब्रिस्तान में उसे दफनाया गया था, तुम वहां जा सकती हो, जा कर देख सकती हो।’

‘अगर तुम दुआ करो’, बूढ़ी महिला ने कहा- ईशू तुम्हारी सहायता करेंगे।’

‘ठीक बात है’ मिसफ़िट ने कहा।
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #9  
Old 04-30-2017, 09:14 AM
kamina_pati kamina_pati is offline
Senior Member
 
Join Date: Jan 2012
Posts: 218,746
Default प्रणय-चिह्नं

जय शन्कर प्रसाद




प्रणय -चिन्ह



''क्या अब वे दिन लौट आवेंगे? वे आशाभरी सन्ध्यायें, वह उत्साह-भरा हृदय-जो किसी के संकेत पर शरीर से अलग होकर उछलने को प्रस्तुत हो जाता था-क्या हो गया?''

''जहाँ तक दृष्टि दौड़ती है, जंगलों की हरियाली। उनसे कुछ बोलने की इच्छा होती है, उत्तर पाने की उत्कण्ठा होती है। वे हिलकर रह जाते हैं, उजली धूप जलजलाती हुई नाचती निकल जाती है। नक्षत्र चुपचाप देखते रहते हैं,- चाँदनी मुस्कराकर घूँघट खींच लेती है। कोई बोलनेवाला नहीं! मेरे साथ दो बातें कर लेने की जैसे सबने शपथ ले ली है। रात खुलकर रोती भी नहीं-चुपचाप ओस के आँसू गिराकर चल देती है। तुम्हारे निष्फल प्रेम से निराश होकर बड़ी इच्छा हुई थी, मैं किसी से सम्बन्ध न रखकर सचमुच अकेला हो जाऊँ। इसलिए जन-संसर्ग से दूर इस झरने के किनारे आकर बैठ गया, परन्तु अकेला ही न आ सका, तुम्हारी चिन्ता बीच-बीच में बाधा डालकर मन को खींचने लगी। इसलिए फिर किसी से बोलने की, लेन-देन की, कहने-सुनने की कामना बलवती हो गई।

''परन्तु कोई न कुछ कहता है और न सुनता है। क्या सचमुच हम संसार से निर्वासित हैं-अछूत हैं! विश्व का यह नीरव तिरस्कार असह्य है। मैं उसे हिलाऊँगा; उसे झकझोरकर उत्तर देने के लिए बाध्य करूँगा।''

कहते-कहते एकान्तवासी गुफा के बाहर निकल पड़ा। सामने झरना था, उसके पार पथरीली भूमि। वह उधर न जाकर झरने के किनारे-किनारे चल पड़ा। बराबर चलने लगा, जैसे समय चलता है।

सोता आगे बढ़ते-बढ़ते छोटा होता गया। क्षीण, फिर क्रमश: और क्षीण होकर मरुभूमि में जाकर विलीन हो गया। अब उसके सामने सिकता-समुद्र! चारों ओर धू-धू करती हुई बालू से मिली समीर की उत्ताल तरंगें। वह खड़ा हो गया। एक बार चारों ओर आँख फिरा कर देखना चाहा, पर कुछ नहीं, केवल बालू के थपेड़े।

साहस करके पथिक आगे बढऩे लगा। दृष्टि काम नहीं देती थी, हाथ-पैर अवसन्न थे। फिर भी चलता गया। विरल छाया-वाले खजूर-कुञ्ज तक पहुँचते-पहुँचते वह गिर पड़ा। न जाने कब तक अचेत पड़ा रहा।

एक पथिक पथ भूलकर वहाँ विश्राम कर रहा था। उसने जल के छींटे दिये। एकान्तवासी चैतन्य हुआ। देखा, एक मनुष्य उसकी सेवा कर रहा है। नाम पूछने पर मालूम हुआ-''सेवक।''

''तुम कहाँ जाओगे?''-उसने पूछा।

''संसार से घबराकर एकान्त में जा रहा हूँ।''

''और मैं एकान्त से घबराकर संसार में जाना चाहता हूँ।''

''क्या एकान्त में कुछ सुख नहीं मिला?''

''सब सुख था-एक दु:ख, पर वह बड़ा भयानक दु:ख था। अपने सुख को मैं किसी से प्रकट नहीं कर सकता था, इससे बड़ा कष्ट था।''

''मैं उस दु:ख का अनुभव करूँगा।''

''प्रार्थना करता हूँ, उसमें न पड़ो।''

''तब क्या करूँ?''

''लौट चलो; हम लोग बातें करते हुए जीवन बिता देंगे!''

''नहीं, तुम अपनी बातों में विष उगलोगे।''

''अच्छा, जैसी तुम्हारी इच्छा।''

दोनों विश्राम करने लगे। शीतल पवन ने सुला दिया। गहरी नींद लेने पर जागे। एक दूसरे को देखकर मुस्कराने लगे। सेवक ने पूछा-''आप तो इधर से आ रहे हैं, कैसा पथ है?''

''निर्जन मरुभूमि।''

''तब तो मैं न जाऊँगा; नगर की ओर लौट जाऊँगा। तुम भी चलोगे?''

''नहीं, इस खजूर-कुञ्ज को छोड़कर मैं नहीं जाऊँगा। तुमसे बोलचाल कर लेने पर और लोगों से मिलने की इच्छा जाती रही। जी भर गया।''

''अच्छा, तो मैं जाता हूँ। कोई काम हो, तो बताओ, कर दूँगा।''

''मेरा! मेरा कोई काम नहीं।''

''सोच लो।''

''नहीं, वह तुमसे न होगा।''

''देखूँगा, सम्भव है, हो जाय।''

''लूनी नदी के उस पार रामनगर के जमींदार की एक सुन्दर कन्या है; उससे कोई संदेश कह सकोगे?''

''चेष्टा करूँगा। क्या कहना होगा?''

''तीन बरस से तुम्हारा जो प्रेमी निवार्सित है, वह खजूर-कुञ्ज में विश्राम कर रहा है। तुमसे एक चिह्न पाने की प्रत्याशा में ठहरा है। अब की बार वह अज्ञात विदेश में जायगा। फिर लौटने की आशा नहीं है।''

सेवक ने कहा-''अच्छा, जाता हूँ, परन्तु ऐसा न हो कि तुम यहाँ से चले जाओ; वह मुझे झूठा समझे।''

''नहीं, मैं यहीं प्रतीक्षा करूँगा।''

सेवक चला गया। खजूर के पत्तों से झोपड़ी बनाकर एकान्त-वासी फिर रहने लगा। उसको बड़ी इच्छा होती कि कोई भूला-भटका पथिक आ जाता, तो खजूर और मीठे जल से उसका आतिथ्य करके वह एक बार गृहस्थ बन जाता।

परन्तु कठोर अदृष्ट-लिपि! उसके भाग्य में एकान्तवास ज्वलन्त अक्षरों में लिखा था। कभी-कभी पवन के झोंके से खजूर के पत्ते खडख़ड़ा जाते, वह चौंक उठता। उसकी अवस्था पर वह क्षीणकाय स्रोत रोगी के समान हँस देता। चाँदनी में दूर तक मरुभूमि सादी चित्रपटी-सी दिखाई देती।

2

माँ भूखी थी। बुढिय़ा झोपड़ी में दाने ढूँढ रही थी। उस पार नदी के कगारे पर दोनों की धुँधली प्रतिकृति दिखाई दे रही थी। पश्चिम के क्षितिज में नीचे अस्त होता हुआ सूर्य बादलों पर अपना रंग फेंक रहा था। बादल नीचे जल पर छाया-दान कर रहा था। नदी में धूप-छाँह बिछी थी। 'सेवक' डोंगी लिये, इधर यात्री की आशा में, बालू के रूखे तट से लगा बैठा था।

उसके केवल माँ थी। वह युवक था। स्वामी-कन्या से वह किसी प्रेमी का सन्देश कह रहा था; राजा (जमींदार) को सन्देह हुआ। वे क्रुद्ध हुए, बिगड़ गये, परन्तु कन्या के अनुरोध से उसके प्राण बच गये। तब से वह डोंगी चलाकर अपना पेट पालता था।

तमिस्रा आ रही थी। निर्जन प्रदेश नीरव था। लहरियों का कल-कल बन्द था। उसकी दोनों आँखे प्रतीक्षा की दूती थीं। कोई आ रहा है! और भी ठहर जाऊँ-नहीं, लौट चलूँ। डाँडे डोंगी से जल में गिरा दिये। 'छप' शब्द हुआ। उसे सिकतातट पर भी पद-शब्द की भ्रान्ति हुई। रुककर देखने लगा।

''माँझी, उस पार चलोगे?'' एक कोमल कण्ठ, वंशी की झनकार।

''चलूँगा क्यों नहीं, उधर ही तो मेरा घर है। मुझे लौटकर जाना है।''

''मुझे भी आवश्यक कार्य है। मेरा प्रियतम उस पार बैठा है। उससे मिलना है। जल्द ले चलो।''-यह कहकर एक रमणी आकर बैठ गई। डोंगी हलकी हो गई, जैसे चलने के लिए नाचने लगी हो। सेवक सन्ध्या के गहरे प्रकाश में उसे आँखें गड़ाकर देखना चाहता था। रमणी खिलखिलाकर हँस पड़ी। बोली-''सेवक, तुम मुझे देखते रहोगे कि खेना आरम्भ करोगे।''

''मैं देखता चलूँगा, खेता चलूँगा। बिन देखे भी कोई खे सकता है।''

''अच्छा, वही सही। देखो, पर खेते भी चलो। मेरा प्रिय कहीं लौट न जाय, कहीं लौट न जाय; शीघ्रता करो।''-रमणी की उत्कण्ठा उसके उभरते हुए वक्ष-स्थल में श्वास बनकर फूल रही थी। सेवक डाँडे चलाने लगा। दो-चार नक्षत्र नील गगन से झाँक रहे थे। अवरुद्ध समीर नदी की शीतल चादर पर खुलकर लोटने लगा। सेवक तल्लीन होकर खे रहा था। रमणी ने पूछा-''तुम्हारे और कौन है?''

''कोई नहीं, केवल माँ है।''

नाव किनारे पहुँच गई। रमणी उतरकर खड़ी हो गई। बोली-''तुमने बड़े ठीक समय से पहुँचाया। परन्तु मेरे पास क्या है, जो तुम्हें पुरस्कार दूँ।''

वह चुपचाप उसका मुँह देखने लगा।

रमणी बोली-''मेरा जीवन-धन जा रहा है। एक बार उससे अन्तिम भेंट करने आई हूँ। एक अँगूठी उसे अपना चिह्न देने के लिए लाई हूँ और कुछ नहीं। परन्तु तुमने इस अन्तिम मिलन में बड़ी सहायता की है, तुम्हीं ने उसका सन्देश पहुँचाया। तुम्हें कुछ दिये बिना हमारा मिलन असफल होगा, इसलिए, यह चिह्न अँगूठी तुम्हीं ले लो।''

सेवक ने अँगूठी लेते हुए पूछा- ''और तुम अपने प्रियतम को क्या चिह्न दोगी?''

''अपने को स्वयं दे दूँगी। लौटना व्यर्थ है। अच्छा, धन्यवाद!'' रमणी तीर-वेग से चली गई।

वह हक्का-बक्का खड़ा रह गया। आकाश के हृदय में तारा चमकता था; उसके हाथ में अँगूठी का रत्न। उससे तारे का मिलान करते-करते झोपड़ी में पहुँचा। माँ भूखी थी। इसे बेचना होगा, यही चिन्ता थी। माँ ने जाते ही कहा-''कब से भोजन बनाकर बैठी हूँ, तू आया नहीं। बड़ी अच्छी मछली मिली थी। ले, जल्द खा ले।'' वह प्रसन्न हो गया।

3

एकान्तवासी बैठा हुआ खजूर इकट्ठा कर रहा था। अभी प्रभात का कोमल सूर्य खगोल में बहुत ऊँचा नहीं था। एक सुनहली किरण-सी रमणी सामने आ गई। आत्मविस्मृत होकर एकान्तवासी देखने लगा।

''स्वागत अतिथि! आओ बैठो।''

रमणी ने आतिथ्य स्वीकार किया। बोली-''मुझे पहचानते हो?''

''तुम्हे न पहचानूँगा, प्रियतमे! अनन्त पथ का पाथेय कोई प्रणय-चिह्न ले आई हो; तो मुझे दे दो! इसीलिए ठहरा हूँ।''

''लौट चलो। इस भीषण एकान्त से तुम्हारा मन नहीं भरा?''

''कहाँ चलूँगा? तुम्हारे साथ जीवन व्यतीत करने का साधन नहीं; करने भी न पाऊँगा, लौटकर क्या करुँगा? मुझे केवल चिह्न दे दो, उसी से मन बहलाऊँगा।''

''मैं उसे पुरस्कार-स्वरूप दे आई हूँ। उसे पाने के लिए तो लूनी तट तक चलना होगा।''

''तो चलूँगा।''

यात्रा की तैयारी हुई। दोनों लौट चले। सेवक जब सन्ध्या को डोंगी लेकर लौटता है; तब उसके हृदय में उस रमणी की सुध आ जाती है। वह अँगूठी निकालकर देखता और प्रतीक्षा करता है कि रमणी लौटे, तो उसे दे दूँ। उसे विश्वास था, कभी तो वह आवेगी।

डोंगी नीचे बँधी थी। वह झोपड़ी से निकलकर चला ही था कि सामने रमणी आती दिखाई पड़ी। साथ में एक पुरुष था। न जाने क्यों, वह डोंगी पर जा बैठा। दोनों तीर पर आकर खड़े हो गये। रमणी ने पूछा- ''मुझे पहचानते हो?''

''अच्छी तरह।''

''मैंने तुम्हें कुछ पुरस्कार दिया था। वह मेरा प्रणय-चिह्न था। मेरा प्रिय मुझे नहीं लेगा, उसी चिह्न को लेगा। इसीलिए तुमसे विनती करती हूँ कि उसे दे दो।''

''यह अन्याय है। मेरी मजूरी मुझसे न छीनो।''

''मैं भीख माँगती हूँ।''

''मैं दरिद्र हूँ, देने में असमर्थ हूँ।''

निरुपाय होकर रमणी ने एकान्तवासी की ओर देखा। उसने कहा-''तुमने तो उसे लौटा देने के लिए ही रख छोड़ा है। वह देखो, तुम्हारी उँगली में चमक रहा है, क्यों नहीं दे देते?''

''मैं समझ गया, इसका मूल्य परिश्रम से अधिक है। तो चलो, अबकी दोनों की सेवा करके इसका मूल्य पूरा कर दूँ परन्तु दया करके इसे मेरे ही पास रहने दो। जिन्हें विदेश जाना है, उनको नौका की यात्रा बड़ी सुखद होती है।''-कहकर एक बार उसने झोपड़ी की ओर देखा। बुढिय़ा मर चुकी थी। खाली झोपड़ी की ओर से उसने मुँह फिरा लिया। डाँडे जल में गिरा दिये।

रमणी ने कहा-''चलो, यात्रा तो करनी ही है, बैठ जायँ।''

एकान्तवासी हँस पड़ा। दोनों नाव पर बैठ गये। नाव धारा में बहने लगी। रमणी ने हँसकर पूछा-''केवल देखोगे या खेओगे भी?''

''नाव स्वयं बहेगी; मैं केवल देखूँगा ही।''

--


E
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
  #10  
Old 04-30-2017, 09:14 AM
aamjayadakha aamjayadakha is offline
Senior Member
 
Join Date: Feb 2009
Posts: 278,209
Default प्रणय-चिह्नं

शुक्रिया
Reply With Quote
Sponsored Links
CLICK HERE TO DOWNLOAD INDIAN MASALA VIDEOS n MASALA CLIPS
Sponsored Links - Indian Masala Movies
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
UKBL ~ 10 Second Banner Rotator

"Uncensored Indian Masala Movies" - The hottest Indian Sex Movies and Mallu Masala clips

Check out beautiful Indian actress in sexy and even TOPLESS poses

Indian XXX Movies!

Widest range of Indian Adult Movies of shy, authentic Desi women.....FULLY NUDE DESI MASALA VIDEOS!!! Click here to visit now!!!

 

UKBL ~ 10 Second Banner Rotator
Sponsored Links
Reply

Thread Tools
Display Modes

Posting Rules
You may not post new threads
You may not post replies
You may not post attachments
You may not edit your posts

BB code is On
Smilies are On
[IMG] code is On
HTML code is Off

Forum Jump


All times are GMT -4. The time now is 12:13 PM.


Powered by vBulletin® Version 3.8.3
Copyright ©2000 - 2017, Jelsoft Enterprises Ltd.

Masala Clips

Nude Indian Actress Masala Clips

Hot Masala Videos

Indian Hardcore xxx Adult Videos

Indian Masala Videos

Uncensored Mallu & Bollywood Sex

Indian Masala Sex Porn

Indian Sex Movies, Desi xxx Sex Videos

Disclaimer: HotMasalaBoard.com DOES NOT claim any responsibility to links to any pictures or videos posted by its members. HotMasalaBoard has a strict policy regarding posting copyrighted videos. If you believe that a member has posted a copyrighted picture / video, please contact Hotman super moderator. Members are also advised not to post any clandestinely shot material.